शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

Akhir kyu?

माँ क्यों कहती थी तुम?
बाहर जाओ तो 
एक पुरुष के साथ जाओ 
पिता , पति, पुत्र या भाई 
मैं एक पुरुष के साथ ही तो बाहर थी 
जो न पिता था
ना ही भाई
पर उसने साथ निभाने की
कसम थी खाई

लड़ गया न वोह
उन दरिंदो से
जो पुरुष ही थे
काश तुम मुझे बता पाती
कि उन पुरुषो की पहचान
जो किसी माँ केसच्चे बेटे न थे
जिनकी कोई बहन न थी
जिनकी कभी बीबी न होगी
जो कभी कन्या संतान नही जनेगे

माँ क्यों बैठती मैं
फिर उस
पीले पर्दों वाली
सफ़ेद बस में ..........


माँ मुझे जीना हैं ....

सोमवार, 10 दिसंबर 2012

Nadi


कभी देखा हैं
तुमने नदी को
अनवरत बहती हैं
कभी रूकती नही
जीवन देती सी
अबाध चलती हैं


और तुम बादल से
कभी इतना बरस
जाते हो उस पर
कि वोह मजबूर हो जाती हैं
तबाही को .


मैं नदी नही हूँ
बस इतना याद रहे ........

Ek stree -do man


एक स्त्री -दो मन

कल जाना हैं तुमने
प्रिय !!
और मैं तुम्हारे साथ जाऊंगी
तुम्हारे प्राण बनकर
सिर्फ मेरी देह यहाँ होगी
अपने कर्तव्य -पालन करती सी

~~~~~~~~
मैं हूँ ना
मैं माँ- भी
मैं पिता भी
उनकी अनुपस्तिथि मैं
बेटा !!!
एक दुसरे का संबल बन
जी ले लेंगे उनके बिना
सोमवार से शनिवार की दूरी

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

शीलू बंद हैं कमरे मैं 
पागल करार दी गयी
कल रात 

आते ही होगे 
मानसिक चिकित्सालय 
वाले
उसको
ले जाने के लिए

उसकी इस
विक्षिप्त हालत का
ज़िम्मेदार कोन ?

उसने तो बस
20 सालो से
घरेलू हिंसा
की क्रिया की
प्रतिक्रिया में
हाथ अपना
उठाया था
पहली बार ................................Neelima Sharma