मंगलवार, 18 जुलाई 2017

अक्षर मेरी धड़कन








अक्षर गुम गये हैं
और ख़तम हो गयी स्याही
और
मन में बहते
भाव के स्त्रोत्र
सूख गये हैं 


तुम जानते थे ना
मैं जिस दिन ना लिखू
अधूरी सी रहती हूँ
न कोई सिंगार अच्छा लगता हैं
न कोई भी मनुहार

तुम मुझे एक वक़्त का खाना मत देना
मुझे दे देना कुछ वक़्त
बस जो सिर्फ मेरा हो
जी लूँ उसमें दिल से दिल को

अक्षर मेरी धड़कन हैं
स्याही मेरा खून
मुझे लिखने को कह दो ना
दिल से


मत ख़राब करो मेरी बची खुची जून
तुम नाराज हो मेरे लिखने से
मैं बीमार हूँ न लिखने से
यह लिखना ही मेरी चिकित्सा हैं
लिखना ही मेरा जूनून


शब्द -दर शब्द दवा असर करती हैं
स्याही खून बनाती हैं
मैं हूँ तेरे होने से
तू हैं मेरे होने से
और तेरा मेरा होना
और मेरा भाव भीना रहना
बस चंद कडवी गोलियों का नही
अक्षरों का मोहताज हैं


.आज मेरे लफ्ज़ लौटा दो मुझको
अपनी जिन्दगी के लिय





















आपका सबका स्वागत हैं .इंसान तभी कुछ सीख पता हैं जब वोह अपनी गलतिया सुधारता हैं मेरे लिखने मे जहा भी आपको गलती देखाई दे . नि;संकोच आलोचना कीजिये .आपकी सराहना और आलोचना का खुले दिल से स्वागत ....शुभम अस्तु












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