शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

क्या तुम भी ?????


क्या तुम भी

शाम की दहलीज़ पर

आस का दिया जलाते हो?

ओर किसी आवारा पत्ते की आवाज़ पर

दरवाज़े की तरफ़ भागे जाते हो ?

क्या तुम भी दर्द छिपाने की कोशिश

करते करते .........

अक्सर थक से जाते हो ?

ओर बिना वज़ह से मुस्कराते हो /?

क्या तुम भी नींद से पहले पलकों पर

ढेरो ख्वाब सजाते हो ?

या फ़िर बिस्टर पर लेट कर

रोते रोते सो जाते हो ........................................................................ नीलिमा निविया




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