बुधवार, 22 जून 2011

Ek kavita likhni hai


mere bheetar aksar uth'ti hai awaze, 
woh jo tum apne lafzo se kah jate ho, 
woh fusfusahatee jo tum sargoshi kar jate ho, 
woh lafz jo jagte hai bheetar mere neend mai bhi , 
jo so jate hai mere chintan mai jagte hue bhi .................

woh lafz aaj bikhre hue hai sab taraf mere saman ki bheed mai ..
jara thahar to sathi mere ............
jara samet loo unko apne daman mai ..............
tere sath beth kar ek nayi "KAVITA " jo likhni hai mujhe..~

- Neelima Sharrma

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर....पर यदि आप हिन्दी फान्ट में लिखेगी..तो ज्यादा प्रभावशाली होगा...शुभकामनाएँ

    welcome on my sites
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  2. shukriya sir .but mujhe hindi fonts mai likhna nhi aata aage se koshish karoongi :)

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  3. नीलिमा जी
    सादर अभिवादन !

    बहुत अच्छी कविता है
    एक कविता लिखनी है

    मेरे भीतर अक्सर उठती है आवाजें ,
    वोह जो तुम अपने लफ्जों से कह जाते हो ,
    वोह फुसफुसाती जो तुम सरगोशी कर जाते हो ,
    वोह लफ्ज़ जो जागते हैं भीतर मेरे नींद में भी ,
    जो सो जाते हैं मेरे चिंतन में जागते हुए भी .................

    वोह लफ्ज़ आज बिखरे हुए हैं सब तरफ मेरे सामान की भीड़ में ..
    जरा ठहर तो साथी मेरे ............
    जरा समेट लूं उनको अपने दामन में ..............
    तेरे साथ बैठ कर एक नयी "कविता " जो लिखनी है मुझे ..~

    - नीलिमा शर्मा



    :) …और हिंदी फोंट में लिखना कहां मुश्किल है … आपके रोमन लिखे को मैंने मात्र ढ़ाई-तीन मिनट की मेहनत से कन्वर्ट किया है

    GMail में compose mail में पर क्लिक करके रोमन में लिखें , हिंदी में स्वतः ही रूपांतरित हो जाएगा :)
    … तो अगली कविता हिंदी में लिख कर मुझे पढ़ने के लिए मेल ज़रूर कीजिएगा …

    …और मेरी रचनाएं पढ़ने-सुनने का भी आमंत्रण है
    हार्दिक शुभकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  4. ओह! अति सुन्दर,शानदार.
    आपके ख्यालों की उडान
    वास्तव में ऊँची है.

    अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

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