शनिवार, 24 सितंबर 2011

MASROOFIYAT


bahut kuch likhna hai 
 shabd gum hai mere ............ 
sardi ki dhoop mai ........... 
dosto ki chupp mai...................
deewali fest jaise mele mai...........
apne kamare  k akele mai.............
ghar ki safai mai ...............
.bachcho ki parai mai.................... 
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fir bhi mujhe bahut kuch likhna hai .........
rat ke andhere par ..............................
subah ki kirno par..........................
alsayi dopahar par ............................
surmai sham par .........................
 fir bhi mujhe kuch likhan hai .................
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teri pyar bhari bato par ..........................
teri gusse bhari aankho par ..............
.meri preshan jindgi par .............
.meri hasti bandgi par ......................
bahut kuch likhna hai ..............
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woh madhumass ki yaade ..............
woh phone par ki khusfusahate ............
 woh lambe lambe khato ki bayani .......... 
bina bole tere mere labo ki kahani .............
.bahut kuch likhna hai mujhe ................... ........................
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kaise likhooo ............??????
jab waqt hota hai tab
 tere pyar ki chadar oudh kar 
so jati hu khyalo mai .
jab khyal hote hai to
 tujhse fursat hi nhi hoti sajan .........
par mujhe bahut kuch likhna hai .......... neelima
.............................................................

बहुत कुछ लिखना है ...
शब्द गुम हैं मेरे..
सर्दी की धुप में ...
दोस्ती की चुप्पी में..
दिवाली जैसे उत्सव के मेले में...
अपने कमरे के अकेलेपन में .
घर की सफाई में...
बच्चो की पढाई में...
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है.............

रात के अँधेरे पर..
सुबह की किरणों पर..
सुरमई शाम पर...
अलसाई दोपहर पर..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है......

उसकी प्यार भरी बातों पर..
उसके गुस्से भरी आँखों पर..
खुद की परेशान जिंदगी पर..
मेरी हंसती बंदगी पर..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है...

वो मधुमास की यादें
वो फ़ोन पर की हुई खुसफुसाहट
वो लम्बे खतो की बयानी...
बिना बोले तेरे मेरे लबो की कहानी..
फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है ....

कैसे लिखूं...
जब वक़्त होता है ..
तब तेरे प्यार की चादर..
ओढ़ कर सो जाती हूँ खयालो में..
जब ख्याल होते हैं...
तो फुर्सत ही नहीं होती सजन...
पर फिर भी मुझे बहुत कुछ लिखना है.............
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4 टिप्‍पणियां:

  1. :) ‎"dil kee baat kabhi juban pe aa jaye.........."....arre juban pe nahi aa paye to koi nahi, tahreer pe to utar hi sakta hai...:) ....waise ye alag hai ki na kahne ka fasana tha, par sab kah daaala!! bahut khubsurat ....chhote chhote shabd ek ho kar bahut kuchh kah jate hain..:)

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