बुधवार, 23 मई 2012


में धुप हु
मुझे बिखरना है
सोना बनकर
इस दुनिया में
मत कैद करो मुझे
अज्ञान क अंधेरो में
मुझे जीना है
चांदनी बनकर
लिखना है अपना नाम
आसमान की उचाई पर
मुझे जीने का हक दो
मुझे पढने का हक दो
मत बंधो अभी रिश्तो के
अनचाहे बन्धनों में ...............................
ज़रा पाँव तो जमने दो .
. कुछ दूर तो खुद चलने दो
रिश्ते भी ओढूगी ..
और छांव जी भर दूंगी ..
बस कुछ पल तो सम्हलने दो..
ये दूरियां तय करने दो

(last 6 lines by Neetta Porwal)
 

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