बुधवार, 23 मई 2012

मौन इक भाषा है जो
बोली जा सकती है
अपनी भावभंगिमाओ से
अपने स्मित अधरों से
अपने अंन्खो से
अपनी देह्चाल से
कोण कहता है तुम मौन हो
तुम बोल रहे हो
अपनी शरारती आँखों से
अपनी होंतो पर थिरकती हसी से
अपने अलबेली चाल से
बच्चा कितना भी चुप रहे
माँ
पढ़ ही लेती है उसके मन की हर भाषा .......................:))))

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