सोमवार, 8 अक्तूबर 2012

बिस्तर की सलवटे भी एक कहानी कहती हैं 
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अब हर सिलवट पेम कहानी की बयानी नही होती 
कुछ राजा- रानी की कहानी नही होती 
बिस्तर की सलवट कुछ ख़ामोशी बयां करती हैं
मन में चलते तूफ़ान बिस्तर पर बवंडर लाते हैं 
कुछ सलवटे भविष्य की कहानी होते हैं
अगले पल क्या होगा सोचती जवानी हैं ......
कुछ सलवटे अतीत की जंग लगी कील
बस गढ़ी रहती हैं सीने में
और रात के तीसरे पहर में दर्द करती हैं
कुछ सलवटे बेवफाई की होती हैं
टूट कर चाह ने वालो की रुसवाई होती हैं
बिस्तर की सलवटे अपनों की बेअदबी भी होती हैं
बिस्तेर की सलवटे टूटी नींद में भी रहती हैं
अब सलवटे कभी खामोश रहती हैं
कभी चीख चीख कर बया करती हैं अपने होने की कहानी
पर हर सिलवट कहती हैं बस एक कहानी ............
किसी के ख्वाब टूटे हैं
किसी के अपने रूठे हैं
किसी के वादे झूठे हैं
किसी के अरमान लुटे हैं ..........................
हर सिलवट की अपनी हैं कहानी
हर सिलवट नही कहती कोई एक प्रेम कहानी ........................

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