गुरुवार, 18 अक्तूबर 2012

सृष्टि का अंत हैं 
इश्वर तू अनंत हैं 
तम हैं अंतस में 
आलोक की तलाश में ........" आवाज़ दे कहाँ है 

हस्तिनापुर सा बना भारत
कोरवो की भीड़ हैं 
दुर्योधन अनेक रूप में 
पांड्वो की तलाश हैं ....................." आवाज़ दे कहाँ है 


शुभ- निशुम्भ भी
तो महिषसुर भी यहाँ
रक्तबीज अनेक हैं
बस शक्ति की तलाश हैं ...." आवाज़ दे कहाँ है



रावण हैं यहाँ तो मेघनाद भी
कुम्ब्करण की तरह सोता समाज हैं
सीता का हरण होता हर रात हैं
एक राम की तलाश हैं ..................." आवाज़ दे कहाँ है


ज्योतिमय पुंज बनो
तम को तुम हरो
आलोकित अंतस करो
मेरे प्यारे रब हमें उस
एक चमत्कार की तलाश हैं.............." आवाज़ दे कहाँ है

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (20-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ! नमस्ते जी!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (20-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ! नमस्ते जी!

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