शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

एक कोना


 मेरे कमरे का एक कोना 
 बस मेरा अपना हैं 
 निहायत अपना 
 मेरी यादे
 मेरे आंसू 
 मेरे सपने 
 मेरे अनजाने अपने 
 सब यहाँ रहते हैं मेरे साथ 
 जब कोई नही होता
 मेरे  साथ 
उस कोने से
मैं खुद को खुद में  ..
ढूढ़ लेती हूँ 
 बेशकीमती हैं यह कोना 
 अदाकारी नही होती ना  यहाँ 
 जबरन  मुस्कराने की 

4 टिप्‍पणियां:


  1. मैं भी ढूंढ़ लूँ अपने लिए एक कोना जहां सुकून हो ........

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  2. सुन्दर प्रस्तुति!
    ईद-उल-जुहा के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ|

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