मंगलवार, 6 नवंबर 2012

हँसी के रूप

रमती  परेशान थी 
 इकलोती पाचवी पास 
औरत  थी मोहल्ले की 
 और पति उज्जड गवार 
 रात शराब के नशे मैं 
 उसने बक्की  थी उसको
माँ- बहन की गालियाँ
    . मर क्यों न गयी रमती
 शरम से 
.
.
 रमती आज मुस्करा रही हैं 
 सामने पीली कोठी वाली  
बाल कटी   मेमसाहेब
 कल रात सड़क पर 
 पति के हाथो पीटी हैं 
 माँ- बहन की गालियों  के साथ  
.
  संस्कार किताबो के मोहताज नही होते 
 रमती हँस  रही हैं किताबो पर 
 अपने पर   
 पीली कोठी  की अभिजत्यता पर 

 खुद पर हँस ना बनता हैं उसका ...............  नीलिमा 

10 टिप्‍पणियां:


  1. खिलखिला कर हंसना बनता है :))

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  2. वाह क्या बात है ... बहुत खूब !


    क्यूँ कि तस्वीरें भी बोलती है - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. बहुत संक्षेप में , बहुत ही अच्छा लिखा |

    सादर

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  4. धन्यवाद ..... तहे दिल से आपकी आभारी हूँ
    Mukesh kumar sinha jee
    Dr Monika Sharma jee
    Shivam mishra jee
    Akash Mishra jee

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