शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

Akhir kyu?

माँ क्यों कहती थी तुम?
बाहर जाओ तो 
एक पुरुष के साथ जाओ 
पिता , पति, पुत्र या भाई 
मैं एक पुरुष के साथ ही तो बाहर थी 
जो न पिता था
ना ही भाई
पर उसने साथ निभाने की
कसम थी खाई

लड़ गया न वोह
उन दरिंदो से
जो पुरुष ही थे
काश तुम मुझे बता पाती
कि उन पुरुषो की पहचान
जो किसी माँ केसच्चे बेटे न थे
जिनकी कोई बहन न थी
जिनकी कभी बीबी न होगी
जो कभी कन्या संतान नही जनेगे

माँ क्यों बैठती मैं
फिर उस
पीले पर्दों वाली
सफ़ेद बस में ..........


माँ मुझे जीना हैं ....

5 टिप्‍पणियां:

  1. सही सवाल - मार्मिक प्रस्तुति

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  2. नारी हो न निराश करो मन को - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. सार्थक प्रश्न उठाती बहुत मर्मस्पर्शी रचना..

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  4. ज्वलंत प्रश्न ????
    एक सोच जो अब बदलनी जरुरी भी है

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