सोमवार, 10 दिसंबर 2012

Ek stree -do man


एक स्त्री -दो मन

कल जाना हैं तुमने
प्रिय !!
और मैं तुम्हारे साथ जाऊंगी
तुम्हारे प्राण बनकर
सिर्फ मेरी देह यहाँ होगी
अपने कर्तव्य -पालन करती सी

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मैं हूँ ना
मैं माँ- भी
मैं पिता भी
उनकी अनुपस्तिथि मैं
बेटा !!!
एक दुसरे का संबल बन
जी ले लेंगे उनके बिना
सोमवार से शनिवार की दूरी

4 टिप्‍पणियां:

  1. समझ सकती हूँ ......... बहुत वर्षों तक महसूस किया है .......... कभी पति परदेश ,कभी बेटा विदेश .... कभी पति विदेश ,कभी बेटा परदेश ....

    एक मन भाई-भतीजा में भी लगा होता है :))

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