सोमवार, 10 दिसंबर 2012

Nadi


कभी देखा हैं
तुमने नदी को
अनवरत बहती हैं
कभी रूकती नही
जीवन देती सी
अबाध चलती हैं


और तुम बादल से
कभी इतना बरस
जाते हो उस पर
कि वोह मजबूर हो जाती हैं
तबाही को .


मैं नदी नही हूँ
बस इतना याद रहे ........

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