मंगलवार, 1 जनवरी 2013

शर्म उदासी को आती नही
जरा सी भी 
कोहरे की तरह 
अड़ियल 
मेरे घर के बाहर खड़ी हैं . 
बंद रखे हैं मैंने
दरवाज़े कसकर
पर खिद्द्कियो से उसके
आने की थाप सुनी हैं ......neelima

Sharam Udaasi Ko
Aati Nhi Jara Si Bhee
Kohre Ki Trah
Adiyal
Mere ghar ke bahar khadi hain
band rakhe hain maine
darwaze kaskar
par khidkiyo se
uske aane ki 

8 टिप्‍पणियां:

  1. बेशर्मों को लाज कहाँ?

    नव वर्ष 2013 की मंगल कामना

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  2. बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    नब बर्ष (2013) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    मंगलमय हो आपको नब बर्ष का त्यौहार
    जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
    ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
    इश्वर की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार.

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  3. सोच में हूँ क्या लिखू .......
    उदासी बाहर खिड़की - दरवाजे से आती है ..... ये भाव तो मन के अन्दर होते हैं न ....... ??

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