रविवार, 3 फ़रवरी 2013

आज तो रविवार है ...

आज रविवार हैं
छुट्टी की बहार हैं
आज रोटी खुद बनाओ
सब्जी की जगह अचार हैं 

अब से देर से मैं उठूँगी
सबसे पहले अखबार मैं पढूंगी
नाश्ता अपना खुद बनाओ
मेरा भी तो आज त्यौहार हैं

चाहे किसी को घर बुलाओ
चाहे किसी के घर जाओ
सज- धज के हड़ताल का
मेरा भी आज विचार हैं

बच्चो का होम वर्क हो या
ऑफिस का पेंडिंग वर्क
घर के साथ खुद निपटाओ
आज मेरी सरकार हैं

6 दिन की मेरी नौकरी
घर में करती सबकी चाकरी
मिलती नही मुझे कभी भी
जरा भी पगार हैं

आज तो रविवार है ....नीलिमा

1 टिप्पणी:

  1. समर्पण में नौकरी नहीं देखी जाती!
    यह तो अहर्निश चाकरी है।
    --
    सुन्दर रचना!

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