शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

आखिरी कविता

आसमान का नीलापन आँखों 
में भरकर 
एक सुंदर सा विचार / दृष्टि 
रच कर 
कुछ ख़ुशी का रंग लेकर 
कुछ उदासी का जल लेकर 
बनाओ एक चित्र
जब तुम झल्ली (पागल)
बन जाओ प्यार में
और भर रंग ह्रदय के सारे
एक ख्याल जो छू जाये
एक लम्हा जो गुजर जाये
एक बूँद जो बरस जाये
एक आह जो तड़प जाये
आखिरी रंग हो जो
इस धरा का
आसमा पर

ऐसे रंग तुम
चित्रित करना
एकाकार से
जैसे लिखी हो
किसी वियोगी ने
अपनी आखिरी कविता

किसी के प्यार में ..........नीलिमा शर्मा

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