मंगलवार, 5 मार्च 2013

धागा मेरी मन्नतो का


हे परमेश्वर ! हे इश्वेर!
तुम सर्वशक्तिमान हो
तुम ही श्री तुम ही ज्ञान हो
हमारे लिय सर्वथा अनजान हो

कौन जानता हैं तुम्हारी लीलाए
जो चाहते तो करते हो आप
कभी रुला जाते हो जार ज़ार
कभी खुशिया देते हो बार बार

आज तेरे दर पर हाथ जोड़े खड़ी
मांगने तुझसे एक सौगात बड़ी
जूझ रहा हैं भाई मेरा जिन्दगी से
लौटा दे हमें उसकी खुशियों की घड़ी

लाखो हैं तेरे अपने, खड़े हैं तेरे द्वारे
मैं भी हूँ बस तुम्हारे ही सहारे
बांध रही हूँ तेरे दर यह धागा
न रहे भतीजा मेरा अभागा

सिंदूर सदा शोभित रहे
माँ का आँचल न भीगे कभी
बहनों की राखी हैं तेरे हाथ में
हम सब हैं भाई के साथ में

मेरी सुन ले यह अर्ज त्रिपुरारि
दुनिया से जीती पर तुझसे मैं हारी
लेले मेरी उम्र का एक हिस्सा
बक्श दे उम्र मेरे भाई की तू सारी

धागा मेरी मन्नतो का
तेरी बताई जन्नतो का
बाँधा हैं मैंने तेरी कलाई
स्वास्थ्य का दान कर तू कन्हाई ......

मेरे छोटे भाई एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं आजकल कीमोथेरेपी चल रही हैं . बस यह फोटो देख कर मंदिरों / मस्जिदों की याद आगयी कहाँ नही मांग रहे हम उसकी सलामती की दुआ ....इश्वेर पर पूरा विश्वास हैं मेरा भाई विजेता बनकर बाहर आएगा इस बीमारी से
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1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति,इश्वर से यहीं प्रार्थना है आपके भाई स्वस्थ लाभ करें.

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