मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

तन्हाई

सुनो!!!
यु तनहा रहने का 
शउर 
सबको नही आता 
तनहा होना अलग होता हैं 
अकेले होने से
और
मैं तनहा हूँ
क्युकी तुम्हारी यादे
तुम्हारी कही /अनकही बाते
मुझे कमजोर करती हैं
लेकिन
तुम्हारी हस्ती
मेरे वजूद में एक हौसला सा बसती है
परन्तु
यह

तन्हाई
सिर्फ मेरे हिस्से में ही नही आई हैं
तेरी हयात में इसने जगह बनायीं हैं
सुनो!!!
यु तनहा रहने का
शउर
सबको नही आता !
तनहा होने में
घंटो खुद को खोना होता हैं
रोते रोते हँसना होता हैं
दामन में भरे हो चाहे कितने कांटे
फूलो की तरह महकना होता हैं.......

34 टिप्‍पणियां:

  1. दामन में भरे हो चाहे कितने कांटे
    फूलो की तरह महकना होता हैं
    लाजवाब पंक्तियाँ
    सादर

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 10/04/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. मेरे लिखे शब्दों को शामिल करने का आपका दिल से आभार बहुत सुन्दर लिंक्स दिए हैं आपने .अपने हलचल ब्लॉग पर .. और अंत में गाना तो सोने पर सुहागा जैसे ......

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  3. सच !
    यु तनहा रहने का
    शउर
    सबको नही आता
    तनहा होना अलग होता हैं
    अकेले होने से ....
    सत्य वचन !
    जो जीता है वही जानता है !!
    God Bless U (*_*)

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    1. आपकी सराहनीय दृष्टि का आभार !

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  4. उत्तर
    1. आपकी सराहनीय दृष्टि का आभार !

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  5. उत्तर
    1. आपकी सराहनीय दृष्टि का आभार !

      हटाएं
  6. वाकई तनहा होने का शऊर सबको नहीं आता ! तन्हाई का हर एक लम्हा किस तरह मन और आत्मा पर भारी पड़ता है इसे हर कोई नहीं झेल सकता ! बहुत सुंदर रचना !

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    1. आपकी स्नेही दृष्टि का बहुत धन्यवाद मित्र ,मेरा आभार मन की गहराई से स्वीकारें !

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  7. आज की ब्लॉग बुलेटिन दिल दा मामला है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आप की सराहना पा कर अभिभूत हूँ . इस के लिए दिल से शुक्रिया. आप की ऐसे ही कृपा दृष्टि बनी रहे . दिल से शुक्रिया और सादर वन्दे.

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  8. वाह.....
    बहुत सुन्दर......
    तनहा रहना भी एक हुनर है....

    अनु

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    1. आपका धन्यवाद मित्र ,बहुत स्नेह भी !

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  9. सही कहा....
    तन्हा होने का शऊर सबको नहीं आता...!!

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    1. . दिल से शुक्रिया और सादर वन्दे.

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  10. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (10-04-2013) के "साहित्य खजाना" (चर्चा मंच-1210) पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
    सूचनार्थ...सादर!

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    1. आप की सराहना पा कर अभिभूत हूँ . इस मधुर टिपण्णी के लिए दिल से शुक्रिया. आप की ऐसे ही कृपा दृष्टि बनी रहे . दिल से शुक्रिया और सादर वन्दे.

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  11. तनहा रहना सबके वश का काम नहीं ...
    एकदम सच और सच ....

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    1. . दिल से शुक्रिया और सादर वन्दे.

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  12. मैं आपके ब्लॉग की परिचयात्मक पंक्तियाँ पढ़ कर अभिभूत हूँ ... हर ऐब सही मुझमे, मगर आज भी मुझको ... अपनों से बदल जाने का अंदाज़ नहीं आया ...

    जैसे जैसे पढ़ती जा रही हूँ सोच रहीं हूँ की आज तक इतनी अच्छी रचनाओं से क्यूँ वंचित रही .... तनहा रहने का शऊर ... अपने आप में अनूठी कल्पना है ....

    अब तो आपके ब्लॉग पर आना-जाना होता ही रहेगा ... इतनी सुन्दर रचनाओं से दूर नहीं रहा जा सकता ...

    Manju Mishra
    www.manukavya.wordpress.com

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    1. आपका स्वागत हैं मेरे ब्लॉग पर ....मैं रेगुलर ब्लॉग लेखन को लेकर ज्यादा गंभीर नही हूँ बस जो मन में भाव उमड़ आते हैं लिख देती हूँ और ब्लॉग पर पोस्ट कर देती हूँ ...... बहुत अच्चा लगता हैं जब कोई आपस प्रेरणा देता हैं तो लिखने का उत्साह बढ़ जाता हैं ....... तहे दिल से आभार

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  13. बहुत अच्छी व्याख्या तन्हाई की लेकिन कोई समझे भी तो ....

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  14. तन्हाई अक्सर उनको ले कर आती है ...
    फिर जब वो आती है तो खुद को भुला देता है इंसान ...

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  15. तन्हा रहने का शहूर---सबको नहीं आता
    क्या खूब कहा आपने

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