मंगलवार, 16 अप्रैल 2013

( उसकी वोह जाने ..मेरी मैं ).

एक फोटो महबूब की 
कुछ सांसे महकी
कुछ धड़कन बहकी 
कुछ नशा
अनकहे
अनबोले
लफ्ज़ का

एक छुवन
कवारे जज्बात की
और जाम भर गया
लबालब प्यार से

और
मन भर चला
उड़ान
क्षितिज तलक

सुवासित हर कोना
देह /दिल का

घूँट घूट कर
नशा करते जाम में
फुसफुसाती उसकी
कुछ नज़्मे

नही पता था
छु जाएगा , उसकी
नशीली आँखों का
जाम
भिगो जायेगा मुझे
इतने करीब से
कि
उसकी सरगोशियां
भर देगी संगीत
रूह में

और देर तक जलता रहेगा
वजूद मेरा
उसके नशे में

लो मैंने जाम तोड़ दिया
अतीत का
नए की तलाश में

और वोह ???

( उसकी वोह जाने ..मेरी मैं )......नीलिमा

12 टिप्‍पणियां:

  1. Ek nigaah se hum khareed le unhe, jinhe badha naaz hai ke woh bikte nahi...

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  2. शुभ प्रभात....
    एक छुवन
    कवारे जजबात की.....

    और मन भर चला
    आपकी यह रचना प्रभावित कर गई


    सादर

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  3. उसकी वोह जाने .... और मेरी मैं ....
    बेहद सशक्‍त भाव

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