रविवार, 28 अप्रैल 2013

नाराज हैं मुझसे

आजकल नींद  नाराज हैं मुझसे 
 सिरहाने भी  अब कोसने लगे हैं 
 
  वास्ता देते हैं मुझे  तुम्हारी बाहों का 
 सपने भी अब मुझे टोकने लगे हैं 


 सवालों का  ढेर   लगा हैं  इर्द गिर्द 
जवाबो में ताने चुभोने  लगे हैं 


 तन्हायी का आलम न पूछ सजना 
आंसू भी आँखों के कोर भिगोने लगे हैं 


 
नाराज हैं  मुझसे मैं जानती हूँ यारा 
 सनम जब से मेरे   पीठ मोड़ कर सोने लगे हैं 

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 01/05/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. मन को छूती हुई रचना
    बहुत खूब
    उत्कृष्ट प्रस्तुति


    विचार कीं अपेक्षा
    आग्रह है मेरे ब्लॉग का अनुसरण करें
    jyoti-khare.blogspot.in
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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