रविवार, 30 जून 2013

कोई फर्क पढता हैं क्या!!!

 कोई फर्क पढता हैं क्या!!! 
 मेरे कह देने 
 तुम्हारे सुन लेने से 
 
समझना जिसको जितना हैं 
 वोह खुद भी 
 उतना ही समझेगा !!!


  निरर्थक  वार्तालाप 
 फासले बढाता हैं 
 सदिया लग जाती हैं 
 जिनको दूर करने  में 

 सो क्या फर्क पड़ता हैं 
 मेरे रो देने से 
 तुम्हारे चुप रह जाने से 


 होगा तो व्ही न 
 जो तुमने सोचा हैं 
चुपचाप अकेले  में .!!!!!!!.........नीलिमा 

koi farq padhta hain kya ? 
 mere kah dene se 
 tumhaare sun lene se !!!


 samajhna jisko jitna  hain 
 woh khud  bhee
utna hi samjhega !!!

 befizool bahasbaazi 
 fasle badati hain 
 sadiyaa lag jaati hain 
 jinko dur karne mein !

 so kya farq padhta hain 
 mere ro dene se 
 tere chup rah jaane se !!


 hoga to wahi na 
 jo tumne socha hain 
 chupchaap  akele mein !!!!!!by neelima sharma 

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 03/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. पढता हैं न
    फर्क पड़ता हैं ....

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