रविवार, 11 अगस्त 2013

कैक्टस

जाने क्यों 
लोगो की फितरत 
काँटों सी होने लगी हैं 
 वक़्त के साथ 
आँगन में अब 
 फूल नही 
 केक्टस  
देखायी  देते हैं 
 जिसकी फितरत 
 दुष्ट लोगो सी होती हैं 
 फूल तो उन पर भी खिलते हैं 
पर  प्यार से छू  देने पर भी 
 चुभ जाते हैं भीतर तक 
 मुझे तो आज भी 
 फूल(दोस्त) ही पसंद हैं 
 गेंदे के 
  चंपा के 
 चमेली के जैसे 
 भीनी भीनी खुशबू
 ( स्वाभाव)वाले 
 कम से कम 
 काँटों /केकटस  की सी 
 फितरत तो नही रखते .नीलिमा शर्मा 

1 टिप्पणी:

  1. सिक्के के दोनों पहलुओं से देखा जाये जिंदगी तो मुझे
    कैक्टस में लगा फूल ज्यादा पसंद है

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