गुरुवार, 29 अगस्त 2013

ख़ामोशी भी कितनी बातूनी

सिर्फ एक पल को अभी आँगन में अपनी उदास अकेली मायूस नखरीली ख़ामोशी को पुकारा पुचकारा सहलाया दुलराया और फिर आसमा को देख चाँद तारो से भरा गुफ्तगू करने लगी खुद ही ख़ामोशी से
ख़ामोशी भी कितनी बातूनी हो जाती हैं ना .................. मौका मिलते ही .............. नीलिमा

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 31/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

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  2. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

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