गुरुवार, 12 सितंबर 2013

नीलिमा होती हैं न हैरानियाँ!!!

मायने लफ्जों के जब बेमानियाँ
किस्से भी होते हैं तब बेमानियाँ 

उम्र प्यार और धोखा 
और तब होती हैं नादानियां!!

रूठ'ना मानना और सताना ,
अच्छी लगती हैं शैतानियाँ!!

गुलाबी इतर से भीगे प्रेम पत्र 
, अच्छी लगती हैं निशानिया!!

नजरे इशारे और छुवन
बेटिया जल्दी होती हैं सयानियाँ!!

ज़िल्लत ,ताने ,बदनामी
तब भी घर से भागती दीवानियाँ!!

सच झूठ और गप्पे ,
मिलकर बनाती हैं कहानिया!!

चुगली गाली और बेईज्ज़ती ,
तब रोती हैं जनानिया!!

दंगे , कतल और आगजनी ,
बर्बाद होती जिन्दगानिया !!

क्रोध , आवेश और हिंसा .
फिर तब मरती हैं जवानियाँ !!

लिखे लफ्ज़ पर कोरे कागज ,
नीलिमा होती हैं न हैरानियाँ!!!

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - शुक्रवार - 13/09/2013 को
    आज मुझसे मिल गले इंसानियत रोने लगी - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः17 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra





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  2. नमस्कार आपकी यह रचना कल शुक्रवार (13-09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (13-09-2013) महामंत्र क्रमांक तीन - इसे 'माइक्रो कविता' के नाम से जानाः चर्चा मंच 1368 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बेमानियाँ,सयानियाँ.... naye shabd prayog .. badhiya!

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  5. उत्तर
    1. शुक्रिया संजय जी आपके दिए लिंक पर गयी थी मैं परन्तु कुछ भी समझ नही आया मुझे

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