रविवार, 22 सितंबर 2013

बिखरते अस्तित्व


तुम्हारी इन दो आँखों मैं
देखने की हिम्मत कभी नही हुयी थी
और आज देख रहा हूँ इनमें
अपने दो अस्तित्व
यथार्थ और पलायन के मध्य 
बिखरते अस्तित्व
एक जो भाग रहा हैं जीवन के सत्यो से
दूसरा जो द्दकेल रहा हैं
जीवन की जिजीविषा से झूझने को
मैं कमजोर .कायर नही
फिर भी ढूढ़ रहा हूँ
अपने होने न होने के सवाल
के हर मुमकिन जवाब को
तुम मेरी हो शोना
अरमानो का काजल लगाकर
नैनो मों सपने भर
उतर आई थी आँगन मेरे
विस्मित सी
अचंभित सी
अज्ञात में ज्ञात तलाशती
परायो में अपने
रुनझुन पायल
छनकती चूडिया
लहकती चाल
बहकती ताल
सोने के दिन थे चादी की राते
करती थी तुम कितना
खिल खिलते हुए अनगिनत
ख़तम न हो सकने वाली बाते
आज चुप हैं वोह नशीली रुनझुन
मैं बोलता हूँ तुम सुन लेने का अभिनय करती सी
आँखों मैं एक सवाल लिय देखती हो मुझे
हुक सी उठ जाती हैं मेरे हृदय में
क्या मैं कायर हूँ
जो तुम्हारी निगाहों के खामोश सवालों का जवाब नही
मेरे पास तुझे देने को अब ख्वाब नही
अक्सर गम रहता हूँ तेरी आँखों की रौशनी मैं
नही समझ पता तेरा एक भी प्रश्न
यह आँखे सामने होती हैं सौ सौ सवाल करती
और जब मैं तलाशने लगता हूँउन में
अपने होने न होने का वजूद
तुम अपनी आँखे बंद कर लेती हो
और ढलका देती हूँ चुपके से
सबसे छिपाकर मोती
और गम हो जाता मेरा सम्पूरण अस्तित्व अँधेरे में
मेरी शोना ...
सुनो न ..
एक बार तो मुझे आँखे भर देखने दो
इन झील सी आँखों मैं
मुझे डूब कर इन में
पार उतरना हैं .................नीलिमा शर्मा

28 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन एक था टाइगर - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल सोमवार (23-09-2013) को "वो बुलबुलें कहाँ वो तराने किधर गए.." (चर्चा मंचःअंक-1377) पर भी होगा!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 25/09/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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  5. बहुत सुंदर पंक्तियाँ
    सही कहा आपने .सुन्दर
    कभी इधर का भी रुख करें
    सादर मदन

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  6. नमस्कार आपकी यह रचना कल मंगलवार (24--09-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

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  7. बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति । कहीं कहीं टाइपिंग में गलतियाँ हैं, देख लीजियेगा ।

    मेरी नई रचना :- चलो अवध का धाम

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  8. बहुत गहरा दर्द है जो चलक रहा है शब्दों में। बहुत ही सुंदर, भावना से ओतप्रोत रचना।

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  9. आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी यह रचना आज हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल(http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/) की बुधवारीय चर्चा में शामिल की गयी है। कृपया पधारें और अपने विचारों से हमें भी अवगत करायें।

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  10. यह बुधवारीय नहीं सोमवारीय है, त्रुटी के लिए क्षमा प्रार्थी।

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