शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2013

तुझ में रब दिखता हैं यारा मैं क्या करू ???

लोग कहते हैं कि सुबह उठते ही करो प्रभू के दर्शन पर मैं जब भी खोलती हूँ अपनी आँखे मुंह अँधेरे तुम सामने दिख जाते हो बाल स्मित मुस्कान लिये बिखरे बाल लिए नींद में खोये से तुम्हारी घनी पलके तुम कभी कृष्ण कभी शिव का रूप लगते हो सजना! अब तुम ही कहो लोगो !!! मुझे किसी इश्वर की क्या जरुरत इनको जो देख लेती हूँ आँखे खुलते ही !!

16 टिप्‍पणियां:

  1. गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का
    हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है....

    संग गुजरे कुछ लम्हों की हो नहीं सकती है कीमत
    गर तनहा होकर जीए तो बर्ष सो बेकार है..

    superb.

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-10-2013) "शरदपूर्णिमा आ गयी" (चर्चा मंचःअंक-1403) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने... मन छूने वाली रचना नीलिमा जी

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  4. मतलब तो रब को देखने की है .. किसी भी रूप में हो ..

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  5. अब तुम ही कहो लोगो !!!
    मुझे किसी इश्वर की क्या जरुरत
    इनको जो देख लेती हूँ
    आँखे खुलते ही !!---------

    वाह प्रेम समर्पण और त्याग की सच्ची और ईमानदार अनुभूति
    गजब ,बहुत सुंदर------
    सादर

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  6. वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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