गुरुवार, 31 अक्तूबर 2013

त्रिवेणी

तेरी फ़िक्र 
बिना किये 
तेरा जिक्र 


तेरी सोचे 
चुपचाप
दिल कटोचे


तेरा आना
बिनबताये
चले जाना


तेरी शान
बढ़ाये
मेरा मान

मेरे लब
तुझे पुकारे
अब और तब

सुरमयी शाम
इंतज़ार
निगोड़े काम


मैं तुम
उम्र भर
उदासी गुम





नीलिमा शर्मा

14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 02/11/2013 को आओ एक दीप जलाएँ ...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 039 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

    उत्तर देंहटाएं
  2. इन छोटी छोटी त्रिवेणियों ने दिल को मोह लिए ...
    बहुत खूबसूरत ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. अनूठी और सुंदर रचनाएँ। धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं