बुधवार, 9 अक्तूबर 2013



Kash !!!
yeh barissh
kam na ho
Kabhi

Barasti rahe yu hi
boond -dar-boond
Mere Tan Man ko
Bhigoti si


Tum Suraj sa
dhahkate ho
Mai badal ban
jati hu baras



meri purnam aankhe
tumko
majboor kar jati hai tab

aksar
chipne ko
baadlo ki aot mei

Mujhe RImjhim pasand hai
or Apne kamre ki khuli khirki
Or baarish mai bheegte hue "Tum

"काश
यह बारिश
कम
न हो
बरसती रहे यु
बूँद दर बूँद
मेरे तन -मन को
भिगोती सी

तुम सूरज सा
दहकते हो
में बादल सी
बरस जाती हु
मेरी नाम आँखे
तुमको मजबूर
कर जाती है तब
अक्सर
छिपने को
बादलो की परतो में
मुझे रिमझिम पसंद है
और खुली खिरकी
अपने कमरे की ....................
और बारिश में भीगते हुए तुम
 —

9 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत सुंदर शब्द चित्र
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    सादर

    आग्रह है---
    पीड़ाओं का आग्रह---

    उत्तर देंहटाएं
  2. ये बरखा रानी तू ज़रा
    जम के बरस
    ये अभी तो आये हैं
    कहते हैं जाए हैं
    उम्र भर न जा पायें

    खुबसूरत प्रस्तुती
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं