गुरुवार, 14 नवंबर 2013

आंसू के चंद कतरे

जो  कहा नही जाता
लबो से
 उसे अक्सर रोया जाता हैं
दिल से
 और बहाया जाता हैं
आँखों से
 लफ्ज़ होते हैं
 हर बूँद में
 आंसू की
 और लोग अक्सर
 उनको छिपाते हैं
 सबसे
खासकर
अपने अपनों से
 क्युकी
 जिन्दगी के
 रहस्य
या तो लब
बयां करते हैं
 या फिर
 आंसू के चंद
कतरे  ..........नीलिमा शर्मा 

24 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (16-11-2013) "जीवन नहीं मरा करता है" चर्चामंच : चर्चा अंक - 1431” पर होगी.
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.
    सादर...!

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  2. क्या बात है,दिल के दर्द को कहा नहीं जाता,रोया जाता है.
    सत्य

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा सोमवार 18/11/2013 को एक आम भारतीय का सच...हिन्दी ब्लागर्स चौपाल चर्चा : अंक 046(http://hindibloggerscaupala.blogspot.in/)- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर।

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  4. सच है ... आंसूं तो वो सब भी बयाँ कर देते है जो लब भी न कह पाते हैं ... इनको तो छुपाना ही पड़ता है अपनों से ... भाव पूर्ण ...

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  5. सुंदर रचना । बधाई आपको नीलिमा जी ।

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