गुरुवार, 2 जनवरी 2014

बेटिया



मायके में मतभेद /दीवारे खड़ी हो तो भी
 चुप सी रह जाती हैं बेटियाँ 
लोग समझते हैं खुश हैंअपने घर में , 
नही तोड़ी जाती हैं उनसे पर रोटिया 

भूख खाने की उनको लगती नही , 
आंसू पीती हैं भीतर दिल के बेटियाँ 
राजनीती करते रिश्ते देख कर भी मौन 
नही खेली जाती उनसे गोटियाँ 

नीलिमा शर्मा





आपका सबका स्वागत हैं .इंसान तभी कुछ सीख पता हैं जब वोह अपनी गलतिया सुधारता हैं मेरे लिखने मे जहा भी आपको गलती देखाई दे . नि;संकोच आलोचना कीजिये .आपकी सराहना और आलोचना का खुले दिल से स्वागत ....शुभम अस्तु

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (03-01-2014) को "एक कदम तुम्हारा हो एक कदम हमारा हो" (चर्चा मंच:अंक-1481) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    ईस्वीय सन् 2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुन्दर प्रस्तुति !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट विचित्र प्रकृति
    नई पोस्ट नया वर्ष !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । नव वर्ष की हार्दिक बधाई।

    उत्तर देंहटाएं