गुरुवार, 28 अगस्त 2014

जिन्दगी

तेरे होने से यु गुलज़ार हुयी जिन्दगी 
लगने लगी अब हमें खुशगवार जिन्दगी 
इतने थपेड़े खाए थे हमने इस्सके पहले 
कि लगने लगी थी हमें , बेज़ार
जिन्दगी






आपका सबका स्वागत हैं .इंसान तभी कुछ सीख पता हैं जब वोह अपनी गलतिया सुधारता हैं मेरे लिखने मे जहा भी आपको गलती देखाई दे . नि;संकोच आलोचना कीजिये .आपकी सराहना और आलोचना का खुले दिल से स्वागत ....शुभम अस्तु

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