मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

आखिरी लम्हे







आखिरी लम्हे
खोया तो बहुत मैंने
पाया बहुत कम
समय अपनी चाल से
चलता रहा चाले 
और मैं मूक अवाक सी
देखती रही
उसकी धोखा धडी
और बहुत पीछे रह गयी
.
.
अपने से
अपनों से
उनसे जुड़े
अपने हर सपने से
___________________ नीलिमा शर्मा Nivia
















आपका सबका स्वागत हैं .इंसान तभी कुछ सीख पता हैं जब वोह अपनी गलतिया सुधारता हैं मेरे लिखने मे जहा भी आपको गलती देखाई दे . नि;संकोच आलोचना कीजिये .आपकी सराहना और आलोचना का खुले दिल से स्वागत ....शुभम अस्तु

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