शनिवार, 5 दिसंबर 2015

सही वक़्त पे



कुछ कह देने से
बात बिगड़ जाएगी
चुप रहे शायद
बात सुधर जायेगी
बात बात की ही नही थी
उनके मूड की थी
उनकीमर्ज़ी हुयीतो
बिसर(विस्मरत) जायेगी
कितना मुश्किल होता
मौके तलाशना.
सही बात के
सही वक़्त पे
कहदेनेके.........
नीलिमाशर्मा
‪#‎निविया‬









आपका सबका स्वागत हैं .इंसान तभी कुछ सीख पता हैं जब वोह अपनी गलतिया सुधारता हैं मेरे लिखने मे जहा भी आपको गलती देखाई दे . नि;संकोच आलोचना कीजिये .आपकी सराहना और आलोचना का खुले दिल से स्वागत ....शुभम अस्तु

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