मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

शीलू बंद हैं कमरे मैं 
पागल करार दी गयी
कल रात 

आते ही होगे 
मानसिक चिकित्सालय 
वाले
उसको
ले जाने के लिए

उसकी इस
विक्षिप्त हालत का
ज़िम्मेदार कोन ?

उसने तो बस
20 सालो से
घरेलू हिंसा
की क्रिया की
प्रतिक्रिया में
हाथ अपना
उठाया था
पहली बार ................................Neelima Sharma

5 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद मार्मिक ...यह व्यथा किसी भी औरत की हो सकती है ,जब तक के वह प्रतिकार ना करें.....

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  2. सब कहते हैं सहना मजबूरी होती है .... प्रतिकार भी तो उतना ही जरुरी है ना .....

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  3. हाँ ऐसा कुछ होता है, कभी कभी भारतीय महिलाओं के साथ...
    बहुत मार्मिक चित्रण...
    बहुत अच्छे ढंग से पेश किया...!

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  4. समाज, हम का कोई ओर ...
    प्रभावी ढंग से उठाया है इस बात को ..

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