शनिवार, 21 सितंबर 2013

तन्हाई की उम्र

तुम आओगे
तुम नही आओगे
इस उहापोह में सुबह गुजर रही हैं
बार बार हाथ
बढ़ता हैं फ़ोन की तरफ
पूछ लू 
क्या बनाना हैं आज
छोले या पनीर पसंदा
फिर रूक जाती हूँ
अगर तुमने कह दिया
नही इस बार नही आना होगा
तो शायद
खिचड़ी भी न बना पाऊ
सोचती ही रह जाती हूँ
अक्सर
तुम्हारी यादो में खोकर
और रसोई सूनी रह जाती हैं
आजका दिन तो
उत्सव सरीखा होता हैं
मेरे और बेटे के लिय
तुम्हारा आना
और बढ़िया खाना
..
सुनो साजन
बना ही लेती हूँ
पसंदा पनीर
साथ में खीर
कम से कम
तुम्हारी उम्मीद में
कुछ वक़्त तो गुजरेगा
शाम तक
और अगर तुमने अभी कह दिया
नही आना हो पा रहा हैं
सॉरी
मेरी
तन्हाई की उम्र और बढ़ जायेगी
और सब्जी कढ़ाई में यूँ ही जल जाएगी .........नीलिमा शर्मा

15 टिप्‍पणियां:

  1. वाह नीलिमा जी, क्या खूब जज़्बात उकेरे हैं...

    उत्तर देंहटाएं
  2. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (22-09-2013) के चर्चामंच - 1376 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  3. मंगलवार 24/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    आप भी एक नज़र देखें
    धन्यवाद .... आभार ....

    शुभप्रभात
    विरहनी की मनोदशा को अच्छी उकेरी आपने
    शुभ दिन

    उत्तर देंहटाएं