संदेश

नीलिमा होती हैं न हैरानियाँ!!!

स्वीकारोक्ति एक पुरुष की

:( मीठी हो गयी हूँ मैं ...........

मैं अतीत के पन्ने नही पढ़ती ..........

इस से अच्छे वफादार ताले / कामगार कहा मिलेंगे ..........

ख़ामोशी भी कितनी बातूनी

मत रो भारत माता

क्या फर्क पडा शहीद हो गया एक और सिपाही

कैक्टस

मेरे लफ्ज़ तल्ख़ हैं अज़ाब से

न करो ज़ख्म की नुमाइश तुम हर नज़र में यहाँ पे धोका है ग़ज़ल