संदेश

चित्र

तुम्हारा हाथ थामे

पुराने ख़त

" चाबियाँ"

बेटिया

नववर्ष की पूर्व संध्या

दिसम्बर की आखिरी पूरी रात

व्यर्थ गया उसका बलिदान

अपनी अपनी जिन्दगी

सपने झूठे होते हैं सुबह के.........

tum -hum

विवेक हीन पल